

दुनिया के सबसे बड़े झूठ हमेशा बहुत सुंदर रंगों में लिखे जाते हैं।
कभी वे साम्राज्य कहलाते हैं।
कभी विकास।
कभी सभ्यता।
और अब—
वे “हरित भविष्य” कहलाते हैं।
5 जून की सुबह फिर आएगी।
सरकारी भवनों पर हरे कपड़े के बैनर टाँगे जाएँगे।
कॉर्पोरेट कार्यालयों में छोटे-छोटे पौधे बाँटे जाएँगे।
बच्चे पृथ्वी की तस्वीर रंगेंगे।
नेता मिट्टी में फावड़ा छुआकर कैमरे की ओर मुस्कुराएँगे।
और उसी समय पृथ्वी, अपने भीतर कहीं बहुत गहरे, चुपचाप काँप रही होगी।
क्योंकि मनुष्य ने पहली बार प्रकृति को नष्ट करना नहीं सीखा है—
उसने पहली बार प्रकृति को बचाने का अभिनय करना सीख लिया है।
रविकांत राऊत
रविकान्त राऊत जबलपुर, मध्यप्रदेश 9425611243
