आलेख, कहानियां, लघु कथायें

मास्टर जी मेरा नाम कैसा दिखता है

आठ सितंबर आता है और गुज़र जाता है, ठीक वैसे ही जैसे साल के तीन सौ चौंसठ और दिन गुज़रते