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लघु कथायें

अतिथि शिक्षक : एक दिन सम्मान, बाकी दिन अपमान

पांच सितंबर की सुबह प्रिंसिपल साहब खुद स्टाफ रूम में मिठाई बांटने आए, वही प्रिंसिपल जो बाकी तीन सौ चौंसठ दिन शाला के अतिथि शिक्षकों को…

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मास्टर जी मेरा नाम कैसा दिखता है

आठ सितंबर आता है और गुज़र जाता है, ठीक वैसे ही जैसे साल के तीन सौ चौंसठ और दिन गुज़रते हैं। बहुत कम लोगों को याद…

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