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मेरे हज़ार मुखौटे

1000 दिन, 1000 कहानियाँ — हर दिन एक नया मुखौटा

बेटे का मुखौटा

माँ ने पूछा—“बेटा,सब ठीक है?” मैंने कहा—“हाँ माँ।” झूठ नहीं था।सच भी नहीं था। बस वो मुखौटा था—जो हम माँ-बाप के लिए पहनते हैं।ताकि वे चिंता…

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सबका चहेता

दुनिया अक्सर सच से ज़्यादा presentation पर भरोसा करती है।असली अपराधी डरावने नहीं,भरोसेमंद दिखते हैं और अक्सर वही होते हैं जिन्हें हम”सबसे अच्छा इंसान”घोषित कर चुके…

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भय का प्रहरी

“रात 2:17।अनजान नंबर।मैंने उठाया।चुप्पी।फिर एक औरत की आवाज़—‘तुम जाग रहे हो…’मैं जम गया।‘कौन?’उसने कहा—‘तुम्हें डर लग रहा है ना?’फोन कट गया।लेकिन मेज़ पर एक काग़ज़ था—जो…

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सफलता का कैदी

आज मैंने जो मुखौटा पहना है,उसका नाम है—सफलता का कैदी। सुबह के अख़बार में मेरा नाम छपा था। राज्य सेवा परीक्षा—चयनित अभ्यर्थियों की सूची। घर में…

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महत्वाकांक्षा का जुआरी

उस शाम मैं एक छोटे से कमरे में बैठा था।कमरा किराए का था। दीवारों पर कोचिंग संस्थानों के पोस्टर लगे थे— “सफलता अब दूर नहीं” “आपका…

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सम्मान का अभिनेता

उस शाम मैं एक शादी में था। भारतीय शादियाँ अजीब जगह होती हैं। यहाँ संगीत भी होता है,मिठाइयाँ भी,और साथ-साथ अदृश्य मंच भी—जहाँ हर कोई अपनी…

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खुली संभावनाओं का मुखौटा

सुबह 6 बजे।मैंने गैस जलाई।क्लिक हुई।आग नहीं लगी।उस क्षण—पहली बार मुझे‘गैस’दिखी।पहले वह सिर्फ़‘चाय बनाने का ज़रिया’थी।अब घटना एक रूटीन का टूटना थी और उस टूटन में—मुझे…

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