6-प्रतीक्षा का मुखौटा
March 31, 2026उस दिन मैं एक रेलवे स्टेशन पर बैठा था। ट्रेन पैंतीस मिनट लेट थी। बोर्ड पर लिखा था — “प्रतीक्षा करें।” जैसे यह कोई सूचना नहीं,…
पूरा पढ़ें →1000 दिन, 1000 कहानियाँ — हर दिन एक नया मुखौटा
उस दिन मैं एक रेलवे स्टेशन पर बैठा था। ट्रेन पैंतीस मिनट लेट थी। बोर्ड पर लिखा था — “प्रतीक्षा करें।” जैसे यह कोई सूचना नहीं,…
पूरा पढ़ें →लंच के लिए हमने वही जगह चुनी जहाँ कभी हम अक्सर आया करते थे। पर अब यह जगह भी बदल चुकी थी — या शायद हम…
पूरा पढ़ें →आज मैं बिना वजह मुस्कुरा रहा था। कोई बड़ी खुशी नहीं थी। कोई उपलब्धि नहीं। बस एक हल्की, लगभग अदृश्य मुस्कान — जो होंठों से ज़्यादा भीतर…
पूरा पढ़ें →घर के बीचों-बीच खड़े होकर अचानक मुझे लगा — मैं कहीं जा नहीं रहा, मैं बस रुकने की जगह बदल रहा हूँ।एक पैर आगे था, दूसरा…
पूरा पढ़ें →आज मैंने तय किया कि मैं कम बोलूँगा। यह कोई संकल्प नहीं था। कोई आध्यात्मिक प्रयोग भी नहीं। बस सुबह उठते समय लगा कि शब्द आज…
पूरा पढ़ें →आज पूरे दिन किसी ने मुझे नहीं देखा। मैं सड़क पर चला — लोग टकराए नहीं। दुकान में गया — दुकानदार ने पूछा नहीं। ऑफिस पहुँचा…
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