निराशा का व्याकरण
एक वैश्विक दर्शन : जब दुनिया के महान मन अंधेरे में उतरे एक रात काफका ने अपनी डायरी में लिखा, […]
एक वैश्विक दर्शन : जब दुनिया के महान मन अंधेरे में उतरे एक रात काफका ने अपनी डायरी में लिखा, […]
एक समय था जब घर सिर्फ एक पता नहीं होता था। वह एक साँस होता था,साझा, उलझी हुई, एक,दूसरे में
शून्य इसे किस रुप में देखा जाये- “निरंकता” के रूप में अथवा “अनंतता” के रूप में ? आज सुबह-सुबह ही , अपने
किसी घटना की चोट हमें इसलिए नहीं लगती कि वह घटित हुई; चोट तो उस अर्थ से लगती है जिसे
मनोविज्ञान, भाषा और दर्शन का एक खूबसूरत संगम है। आइये इसे एक कहानी के माध्यम से समझने की कोशिश करते
दुनिया अक्सर उन घटनाओं से हिल जाती है जिनकी कल्पना किसी ने नहीं की होती। सब कुछ सामान्य लगता है,