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व्यंग्य

धरती माँ, थोड़ा और एडजस्ट कर लो

सोसाइटी के पार्क में सुबह-सुबह भारी हलचल थी। ढोल नहीं था, पर उसका शोर मौजूद था – माइक से बार-बार गूँजती आवाज़, “आज पर्यावरण दिवस के…

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पुरुष की कमर और आयोडेक्स का बैर

हम भारतीय पुरुष की कमर हैं। हमें “हाय” कहना नहीं आता। सुबह सात बजे सिलेंडर ख़त्म हुआ। रमेश उठा, तीन मंज़िल उतरा, सिलेंडर वाले से माथापच्ची की,…

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