वोटर लिस्ट की सफ़ाई या लोकतंत्र का सफ़ाया?
October 24, 2026 · 7 मिनटकल्पना कीजिए कि किसी अस्पताल के तीन सबसे वरिष्ठ डॉक्टर एक मरीज़ का ऑपरेशन कर रहे हों, और ऑपरेशन थियेटर से बाहर निकलते ही दो डॉक्टर…
पूरा पढ़ें →"मेरे लिए लिखना कोई शौक नहीं — यह सांस लेने जैसा है।"
दर्द, प्रेम, ख़ामोशी और मानव मन की परतों को छूती रचनाएँ — जहाँ रोशनी कम होती है, पर सच ज़्यादा।
कल्पना कीजिए कि किसी अस्पताल के तीन सबसे वरिष्ठ डॉक्टर एक मरीज़ का ऑपरेशन कर रहे हों, और ऑपरेशन थियेटर से बाहर निकलते ही दो डॉक्टर…
पूरा पढ़ें →डेटा निजता का सवाल हमारे यहाँ अक्सर तब उठता है जब किसी का बैंक खाता खाली हो जाता है या किसी की तस्वीर बिना इजाज़त वायरल…
पूरा पढ़ें →हर एक डॉलर का सामान हम चीन को बेचते हैं, तो बदले में छह डॉलर से ज़्यादा का सामान वहाँ से ख़रीद लाते हैं। चीन से…
पूरा पढ़ें →फॉरएवर केमिकल्स के बारे में सबसे डराने वाली बात उनका ज़हर नहीं, उनका नाम है। ये रसायन सच में “हमेशा के लिए” रहते हैं। ये न…
पूरा पढ़ें →शनिवार की शाम मेरे लिए चाय की शाम होती है। घर से थोड़ी दूर सड़क के किनारे एक छोटी-सी चाय की टपरी है। टीन की छत,…
पूरा पढ़ें →किशोर न्याय का असली इम्तिहान अदालत के भाषणों में नहीं, उस पंद्रह साल के लड़के के इंतज़ार में होता है जो महीनों से एक बोर्ड के…
पूरा पढ़ें →देश में साइबर ठगी अब किसी इक्का-दुक्का बदक़िस्मत की कहानी नहीं रह गई है। अपने आसपास ही नज़र डालिए। किसी रिटायर्ड शिक्षक को “डिजिटल अरेस्ट” के…
पूरा पढ़ें →चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठा सवाल इस हफ़्ते दिल्ली की सड़कों तक पहुँच गया, पर सड़क पर पहुँचते-पहुँचते वह सवाल किसी और ही चीज़ में…
पूरा पढ़ें →जीएसटी गिरफ़्तारी का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव आज जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की मेज़ पर है, और यह सिर्फ़ टैक्स कानून की एक धारा का…
पूरा पढ़ें →दीपावली की जगमगाती रात, एक सुनार का तराज़ू और बीस बरस पुराना अपराधबोध — दीपावली की यह कहानी “विश्वगाथा” त्रैमासिक पत्रिका (गुजरात) के अक्टूबर–दिसंबर अंक में…
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