निराशा का व्याकरण
एक वैश्विक दर्शन : जब दुनिया के महान मन अंधेरे में उतरे एक रात काफका ने अपनी डायरी में लिखा, […]
एक वैश्विक दर्शन : जब दुनिया के महान मन अंधेरे में उतरे एक रात काफका ने अपनी डायरी में लिखा, […]
वो तमाम बातें रह रह कर याद आती हैं मुझे जिनसे दिल में दर्द उठता है गोता लगा निराशा के
मध्यप्रदेश के एक छोटे-से कस्बे में—जहाँ शाम को अज़ान और मंदिर की घंटी एक साथ सुनाई देती है—वहाँ की एक
माँ ने पूछा—“बेटा,सब ठीक है?” मैंने कहा—“हाँ माँ।” झूठ नहीं था।सच भी नहीं था। बस वो मुखौटा था—जो हम माँ-बाप
दुनिया अक्सर सच से ज़्यादा presentation पर भरोसा करती है।असली अपराधी डरावने नहीं,भरोसेमंद दिखते हैं और अक्सर वही होते हैं
“रात 2:17।अनजान नंबर।मैंने उठाया।चुप्पी।फिर एक औरत की आवाज़—‘तुम जाग रहे हो…’मैं जम गया।‘कौन?’उसने कहा—‘तुम्हें डर लग रहा है ना?’फोन कट
आज मैंने जो मुखौटा पहना है,उसका नाम है—सफलता का कैदी। सुबह के अख़बार में मेरा नाम छपा था। राज्य सेवा
उस शाम मैं एक छोटे से कमरे में बैठा था।कमरा किराए का था। दीवारों पर कोचिंग संस्थानों के पोस्टर लगे
उस शाम मैं एक शादी में था। भारतीय शादियाँ अजीब जगह होती हैं। यहाँ संगीत भी होता है,मिठाइयाँ भी,और साथ-साथ