भय का प्रहरी
“रात 2:17।अनजान नंबर।मैंने उठाया।चुप्पी।फिर एक औरत की आवाज़—‘तुम जाग रहे हो…’मैं जम गया।‘कौन?’उसने कहा—‘तुम्हें डर लग रहा है ना?’फोन कट
“रात 2:17।अनजान नंबर।मैंने उठाया।चुप्पी।फिर एक औरत की आवाज़—‘तुम जाग रहे हो…’मैं जम गया।‘कौन?’उसने कहा—‘तुम्हें डर लग रहा है ना?’फोन कट
आज मैंने जो मुखौटा पहना है,उसका नाम है—सफलता का कैदी। सुबह के अख़बार में मेरा नाम छपा था। राज्य सेवा
उस शाम मैं एक छोटे से कमरे में बैठा था।कमरा किराए का था। दीवारों पर कोचिंग संस्थानों के पोस्टर लगे
उस शाम मैं एक शादी में था। भारतीय शादियाँ अजीब जगह होती हैं। यहाँ संगीत भी होता है,मिठाइयाँ भी,और साथ-साथ
उस सुबह मैं बस अड्डे पर खड़ा था। छोटे शहर का बस अड्डा था। वहीं जहाँ चाय की भाप,धूल,पसीना और
मेरे भीतर कई कमरे हैं। हर कमरे में एक मुखौटा टंगा है। जिंदगी जब भी मेरे सामने कोई नई चुनौती
यह कथा हर उस लेखक, कलाकार, इंसान की है जो किसी दोस्त की सफलता पर ताली बजाते हुए भीतर से
सुबह 6 बजे।मैंने गैस जलाई।क्लिक हुई।आग नहीं लगी।उस क्षण—पहली बार मुझे‘गैस’दिखी।पहले वह सिर्फ़‘चाय बनाने का ज़रिया’थी।अब घटना एक रूटीन का
10 में से 1 व्यक्ति ऐसा होता है—जो जहाँ भी जाता है,वहाँ ज़हर घोल देता है।समस्या यह नहीं कि वे
“‘Follow your passion’—सबसे बड़ा झूठ है।Passion पेट नहीं भरता, और झूठा passion आपको तोड़ देता है।मैंने 5 साल बर्बाद किए।फिर