रचनाएँ

नवीनतम आलेख, कहानियां और कवितायें

दर्द, प्रेम, ख़ामोशी और मानव मन की परतों को छूती रचनाएँ — जहाँ रोशनी कम होती है, पर सच ज़्यादा।

कैंसर की दवा पर दस गुना मुनाफ़ा: इलाज या वसूली?

किसी परिवार में जब पहली बार “कैंसर” शब्द बोला जाता है, तो उसी दिन से घर का हिसाब-किताब बदल जाता है। पहले रिपोर्टें आती हैं, फिर…

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भूजल के लगातार सूखते जाने का संकट

विगत दिनों  दिल्ली के भारत मंडपम में एक बड़ा तमाशा शुरू हुआ। नौवां “इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक” खुला है, उपराष्ट्रपति ने इसका उद्घाटन किया , दुनिया…

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ग्रेट निकोबार: जिनसे पूछा ही नहीं गया, उनकी ‘हाँ’ कैसे मान ली?

किसी से उसकी ज़मीन माँगने के दो तरीके होते हैं। पहला, उसके सामने बैठकर पूरी बात बताई जाए: क्या बनेगा, कितना जंगल कटेगा, उसका गाँव कहाँ…

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गार्गी से गीब्रा तक-स्त्री-ऋषिकायें और ए.आई.-एथिक्स

 जब प्रश्न ही ब्रह्म था, और आज भी है जबलपुर में नर्मदा के किनारे एक छोटे-से कोचिंग सेंटर में, शाम की उस घड़ी जब सूरज घाटों…

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पुस्तक समीक्षा मौन संवाद: “कराहते कुरुक्षेत्र में युयुत्सु – बर्बरीक संवाद” की समीक्षा ‘”कुलीनता और धर्म पर एक मौन प्रतिरोध”

  महाभारत का काल केवल युद्ध का काल नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर के धर्म और अधर्म, कुलीनता और कर्मशीलता, नीति और कृपणता के संघर्ष का…

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पराली प्रबंधन की असली परीक्षा अभी बाकी है

सितंबर का महीना उत्तर भारत के लिए एक अदृश्य उलटी गिनती लेकर आता है। पंजाब और हरियाणा के खेतों में धान की बालियां अभी हरी हैं,…

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