
10 में से 1 व्यक्ति ऐसा होता है—जो जहाँ भी जाता है,वहाँ ज़हर घोल देता है।समस्या यह नहीं कि वे मौजूद हैं।समस्या यह है—हम उन्हें पहचानते नहीं।और जब पहचानते हैं—तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
मैंने सोचा—वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त है।5 साल बाद पता चला—वह सबसे बड़ा दुश्मन था।धीमा ज़हर।इतना धीमा कि पता ही नहीं चला कब मर गया मैं।
पहली बार जब मैं उससे मिला—तो बहुत अच्छा लगा।
ऑफिस की पहली meeting थी।नई team।नए लोग।
वह आया।मुस्कुराया।हाथ मिलाया।
“अरे यार,तुम भी यहाँ!बहुत बढ़िया।अब मज़ा आएगा।”
मैंने सोचा—अच्छा इंसान है।Positive vibes।
लेकिन 10 लोगों की उस team में—एक ज़हरीला साँप घुस चुका था।
और मुझे पता नहीं था।
शुरुआती तीन महीने बहुत अच्छे थे।
वह हर किसी की मदद करता।हँसाता।Lunch share करता।
लेकिन धीरे-धीरे—कुछ patterns दिखने लगे।
जब कोई अच्छा idea देता—वह कहता,”हाँ यार!बिल्कुल सही!”और फिर boss के सामने वही idea अपना बताकर present करता।
जब किसी का काम अच्छा होता—वह पहले तारीफ़ करता,फिर एक”लेकिन”जोड़ता।”बहुत बढ़िया है यार!लेकिन क्या तुमने यह सोचा…?”और फिर doubt डाल देता।
जब दो लोगों में झगड़ा होता—वह दोनों को अलग-अलग बुलाकर कहता,”मैं तुम्हारी side हूँ।लेकिन वो तो…”और दोनों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काता।
मैंने इन सबको ignore किया।
क्योंकि—अधिकांश लोग यह भी नहीं जानते कि उन्हें क्या नापसंद है।
मुझे उससे थोड़ी discomfort होती थी।लेकिन मैं नहीं समझ पाया—क्यों।
तो मैंने सोचा—शायद मैं overthink कर रहा हूँ।
छह महीने बाद—office में माहौल बदल गया।
पहले सब दोस्त थे।अब सब groups में बंट गए।
कोई किसी से बात नहीं करता।हर कोई किसी से नाराज़।
और बीच में—वह।
सबका”दोस्त”।सबका”भरोसेमंद”।
लेकिन अगर ध्यान से देखो—तो हर झगड़े में उसका हाथ था।
एक दिन मेरी एक colleague ने मुझसे कहा,”तुम्हें पता है—उसने मुझसे कहा था कि तुम मेरे बारे में बुरा बोलते हो।”
मैं चौंका।”मैंने कब?”
“मैं भी यही सोच रही थी।लेकिन उसने बहुत विश्वास से कहा था।”
हम दोनों ने मिलकर investigate किया।
पता चला—उसने हर किसी से यही कहा था।
Military strategist John Boyd का एक सिद्धांत है—OODA Loop:
1.Observe—देखो
2.Orient—समझो
3.Decide—फ़ैसला करो
4.Act—करो
जो यह cycle तेज़ी से पूरा करता है—वह आगे निकल जाता है।
व्यापार में।युद्ध में।जीवन में।
उसने यह cycle बहुत तेज़ी से पूरा किया था:
•Observe:Office में नए लोग आए हैं।अभी सब vulnerable हैं।
•Orient:अगर मैं सबके बीच खड़ा हो जाऊँ—तो power मेरी हो जाएगी।
•Decide:मैं सबको एक-दूसरे से लड़वाऊँगा।
•Act:झूठ फैलाना शुरू किया।
हम सब—बहुत देर से समझे।
और तब तक—बहुत बड़ा नुकसान हो चुका था।
एक रात मैं सो नहीं पाया।
मैं सोचता रहा—मुझे उससे इतनी नफ़रत क्यों है?
और फिर समझ आया—नफ़रत कोई negative चीज़ नहीं है।यह एक compass है—दिशासूचक।वो बताता है कि कौन-सी चीज़ें हमें disturb करती हैं।वे हमें बताती हैं कि हम कौन हैं।
मुझे उससे नफ़रत इसलिए थी—क्योंकि वह वो था जो मैं कभी नहीं बनना चाहता था।
Manipulative।Fake।Toxic।
मेरी नफ़रत—मेरी values की पहचान थी।
एक दिन मैंने उससे सीधे बात की।
“तुम जानबूझकर यह सब कर रहे हो न?”
वह मुस्कुराया।”क्या कर रहा हूँ मैं?”
“झूठ फैलाना।लोगों को लड़वाना।”
उसकी मुस्कान और चौड़ी हो गई।
“Proof है तुम्हारे पास?”
नहीं था।
वह बोला,”देखो यार—यह office politics है।सब करते हैं।मैं तो बस survive कर रहा हूँ।”
मैंने पूछा,”तुम्हें इससे खुशी मिलती है?”
उसने एक लंबी नज़र से मुझे देखा।फिर बोला—
“खुशी?नहीं।Control मिलता है।और मेरे लिये control—किसी भी खुशी से बढ़कर है।”
उस रात मैंने research की।Toxic people के बारे में।
पता चला—
10 में से 1 व्यक्ति ऐसा होता है—जो जहाँ भी जाता है,वहाँ ज़हर घोल देता है।
और उनकी कुछ common traits होती हैं:
1.Charm offensive:शुरुआत में बहुत अच्छे लगते हैं
2.Triangulation:दो लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काना
3.Gaslighting:आपको doubt करवाना कि आप सही सोच रहे हो या नहीं
4.Victim playing:हर बार खुद को victim बनाना
5.No accountability:कभी गलती स्वीकार नहीं करना
वह—सब checklist पूरी करता था।
समस्या यह नहीं कि toxic लोग मौजूद हैं।
समस्या यह है कि लोग उन्हें समझते नहीं हैं।
और जब तक समझते हैं—तब तक:
•Trust टूट चुका होता है
•Relationships ख़राब हो चुके होते हैं
•Mental health damage हो चुकी होती है
मैं भी देर से समझा।
और तब तक—मेरी पूरी team विषाक्त हो चुकी थी।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि उसका विरोध करते-करते मैं भी धीरे-धीरे उसके जैसा ही होने लगा था।
मैं भी लोगों के बारे में gossip करने लगा था।
मैं भी पीठ पीछे बातें करने लगा था।
मैं भी”survive”के नाम पर गंदे खेल खेलने लगा था।
क्योंकि जब आप toxic environment में रहते हैं—तो आप या तो छोड़ देते हैं—या खुद toxic बन जाते हैं।
और मैं—दूसरा वाला बन रहा था।
एक रात मैंने अपना OODA Loop चलाया:
Observe:मैं बदल रहा हूँ।और ये पाया कि ये बदलाव गलत दिशा में जा रहा है।
Orient:अगर मैं यहाँ रहा—तो मैं वो बन जाऊँगा जिससे मुझे नफ़रत है।
Decide:मुझे यहाँ से जाना होगा।
Act:अगले दिन resignation दे दी।
आखिरी दिन जब मैं office छोड़ रहा था—
उस कमीने ने कहा,”यार,तुम जा रहे हो?बुरा लगेगा।”
मैंने उसकी आँखों में देखा।
उसे कोई दुख नहीं था।था तो बस एक सफल शिकार का satisfaction।और होठों पर एक तिरछी कमीनगी भरी”श्वान-मुस्कान”।
एक और व्यक्ति टूटकर चला गया।उसका सिस्टम पर नियंत्रण और बढ़ गया।
फिर भी मैंने मुस्कुराकर कहा,”तुम्हें पता है—तुमने मुझे एक बहुत बड़ी चीज़ सिखाई।”
“क्या?”
“कि नफ़रत भी ज़रूरी है।वह बताती है—तुम किसकी तरह नहीं बनना चाहते।”
फिर मैं मुड़ा।और चला गया।
अब मैं अपने नये attitude वाला इंसान हूँ,जिसका अपना एक”swag”है।
जो नापसंद होने पर बेहिचक—”ना”कह सकता है।
जो कोई भी कितना भी influential हो,अगर वह toxic है तो उसे सबके सामने नंगा करते हुए अपने से दूर रखता है।
रविकांत राऊत
जबलपुर मध्यप्रदेश
