सही बंदा है यार का मुखौटा
May 22, 202610 में से 1 व्यक्ति ऐसा होता है—जो जहाँ भी जाता है,वहाँ ज़हर घोल देता है।समस्या यह नहीं कि वे मौजूद हैं।समस्या यह है—हम उन्हें पहचानते…
पूरा पढ़ें →दर्द, प्रेम, ख़ामोशी और मानव मन की परतों को छूती रचनाएँ — जहाँ रोशनी कम होती है, पर सच ज़्यादा।
10 में से 1 व्यक्ति ऐसा होता है—जो जहाँ भी जाता है,वहाँ ज़हर घोल देता है।समस्या यह नहीं कि वे मौजूद हैं।समस्या यह है—हम उन्हें पहचानते…
पूरा पढ़ें →“‘Follow your passion’—सबसे बड़ा झूठ है।Passion पेट नहीं भरता, और झूठा passion आपको तोड़ देता है।मैंने 5 साल बर्बाद किए।फिर सच जाना। जब पढ़ाई पूरी करने…
पूरा पढ़ें →“Counterfeit Yes: जब लोग कहते हैं ‘हाँ, ज़रूर’ और फिर ग़ायब हो जाते हैं। यह बुराई नहीं — लोगों को खुश रखने की बीमारी है। और…
पूरा पढ़ें →“अगर यह कहानी आपको चुभे…तो शायद यह आपके लिए है।” “शायद मैं ही गलत थी”—यह वाक्य सबसे ख़तरनाक है।क्योंकि यह तब बोला जाता है जब कोई…
पूरा पढ़ें →जिस रात मुझे वह मिला जो मैं चाहता था—उस रात मैं बहुत देर तक छत की सफ़ेद दीवार देखता रहा।कोई उत्सव नहीं था भीतर। कोई ढोल…
पूरा पढ़ें →“वह समंदर जो कभी नहीं आया” शाम ढल रही थी।छत पर रखी चाय ठंडी हो चुकी थी—लेकिन मैंने उसे पिया नहीं। बस पकड़े रहा। जैसे कप…
पूरा पढ़ें →“सामान्यता का मुखोटा-जहां दीवारें याद रखती हैं” मैं तीन महीने, पाँच दिन और सत्रह घंटे से इसी कमरे में हूँ, लेकिन कमरा शायद सैकड़ों साल से…
पूरा पढ़ें →संयुक्त परिवार का आखिरी चूल्हा बसंती देवी के हाथों में अब वह ताकत नहीं रही जो कभी पांच किलो आटे को सानते वक्त दिखती थी। पर…
पूरा पढ़ें →मिथक के बाद मनुष्य देखिए, चेहरों की भीड़ सजी, सच पर आवरण है, क्यों उसमें कोई दाग नहीं। मनुष्य है मंचों पर, जीवन अभिनय करता…
पूरा पढ़ें →एक समय था जब घर सिर्फ एक पता नहीं होता था। वह एक साँस होता था,साझा, उलझी हुई, एक,दूसरे में गुँथी हुई साँस। दादा की खाँसी,…
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