आज गांधी होते तो जेन-ज़ी से क्या कहते?
October 2, 2026 · 8 मिनट2 अक्टूबर केवल गांधी का जन्मदिन नहीं, यह उस प्रश्न का दिन भी है कि गांधी आज होते तो हमें क्या कहते। हर वर्ष 2 अक्टूबर…
पूरा पढ़ें →दर्द, प्रेम, ख़ामोशी और मानव मन की परतों को छूती रचनाएँ — जहाँ रोशनी कम होती है, पर सच ज़्यादा।
2 अक्टूबर केवल गांधी का जन्मदिन नहीं, यह उस प्रश्न का दिन भी है कि गांधी आज होते तो हमें क्या कहते। हर वर्ष 2 अक्टूबर…
पूरा पढ़ें →किसी परिवार में जब पहली बार “कैंसर” शब्द बोला जाता है, तो उसी दिन से घर का हिसाब-किताब बदल जाता है। पहले रिपोर्टें आती हैं, फिर…
पूरा पढ़ें →तुम चली गईं, तब भी कमरा कहां खाली हुआ तुम्हारी ग़ैरहाज़िरी बैठी रही कुर्सी पर, और खिड़की के पास, तुम्हारी आवाज़ ठहरी रही। आज सुबह अधजागी…
पूरा पढ़ें →किसी भी इमारत में सबसे नाज़ुक क्षण वह होता है जब उसकी छत ढाली जा रही होती है। सरिया बँध चुका होता है, शटरिंग खड़ी होती…
पूरा पढ़ें →रुपये की गिरावट की खबर अब अख़बार के पहले पन्ने से खिसककर बिज़नेस पेज के किसी कोने में पहुँच गई है। 94, फिर 95, फिर…
पूरा पढ़ें →दिल्ली की मतदाता सूची पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई हो गई। मामला 21 सितंबर को सूचीबद्ध था, बहस 22 को हुई, और फैसला अभी नहीं आया।…
पूरा पढ़ें →रजिस्टर संख्या 27/1984 को अलमारी के तीसरे खाने में रखा जाता था। यह बात दफ़्तर में किसी नियम-पुस्तिका में नहीं लिखी…
पूरा पढ़ें →आठ करोड़ सत्तर लाख। यह अकेला एक आंकड़ा है, पर इसके भीतर एक पूरी पीढ़ी की बेचैनी छिपी है। नीति आयोग की एक ताज़ा रिपोर्ट कहती…
पूरा पढ़ें →आज से ठीक एक साल पहले, 21 सितंबर 2025 को, अमेरिका ने एक ऐसा फैसला सुनाया था जिसकी गूंज बेंगलुरु के पीजी कमरों से लेकर हैदराबाद…
पूरा पढ़ें →गाँव का नाम था देवपुर—नदी के किनारे बसा, पीपल और नीम की छाया में साँस लेता हुआ एक साधारण-सा गाँव। देवपुर में एक पुराना मंदिर था,…
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