रचनाएँ

नवीनतम आलेख, कहानियां और कवितायें

दर्द, प्रेम, ख़ामोशी और मानव मन की परतों को छूती रचनाएँ — जहाँ रोशनी कम होती है, पर सच ज़्यादा।

देह रुकी, मन बह चला’ : मन की अनवरत यात्रा का काव्य-संसार

मेरी कविता-संग्रह ‘देह रुकी, मन बह चला’ पर इंदौर समाचार पत्र  में समीक्षक: नृपेन्द्र अभिषेक ‘नृप’ द्वारा दी गई पुस्तक समीक्षा मेरे लिए एक सुखद और आत्मीय…

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आईआईटी की तीसरी मौत: मेरिट के दुर्ग में जाति की सेंध

मुंबई के पवई इलाके में आईआईटी बॉम्बे का कैंपस देश के सबसे चमकदार सपनों का पता माना जाता है। बारहवीं की परीक्षा देने वाले लाखों बच्चे…

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अनुकरण की संस्कृति : अतीत से वर्तमान की यात्रा

अनुकरण की संस्कृति गढ़ने की ढाई हज़ार साल पुरानी भारतीय तरकीब एक लड़का जंगल में मिट्टी की एक मूर्ति बनाता है। सामने कोई गुरु नहीं होता,…

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सौ फ़ीसदी टैरिफ़ की धमकी और भारत की स्वतंत्रता का असली इम्तिहान

कल्पना कीजिए एक ऐसा घर, जिसे बिजली दो पड़ोसियों से मिलती है – एक सस्ती लेकिन विवादित, दूसरी महंगी लेकिन ‘सम्मानजनक’। अब वह पड़ोसी जो महंगी…

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सपनों पर लगा टैक्स: क्या भारत अब अपने ही युवाओं को घर में मौका देना सीखेगा?

पिछले तीन दशकों में भारत के लाखों घरों में एक ख़्वाब पला-बढ़ा है। इंजीनियरिंग कॉलेज में दाख़िला लेते ही एक अनकहा रोडमैप तय हो जाता है,…

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‘देह रुकी, मन बह चला’ : मन की अनवरत यात्रा का काव्य-संसार

। मेरी कविता-संग्रह ‘देह रुकी, मन बह चला’ पर हरिभूमि समाचार पत्र  में समीक्षक: नृपेन्द्र अभिषेक ‘नृप’ द्वारा दी गई पुस्तक समीक्षा मेरे लिए एक सुखद और…

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