नवीनतम आलेख, कहानियां और कवितायें
दर्द, प्रेम, ख़ामोशी और मानव मन की परतों को छूती रचनाएँ — जहाँ रोशनी कम होती है, पर सच ज़्यादा।
हरे झूठ का महोत्सव
September 21, 2026 · 1 मिनटदुनिया के सबसे बड़े झूठ हमेशा बहुत सुंदर रंगों में लिखे जाते हैं। कभी वे साम्राज्य कहलाते हैं। कभी विकास। कभी सभ्यता। और अब— वे “हरित…
पूरा पढ़ें →रिटायरमेंट प्लान
September 21, 2026 · 1 मिनटमेहताजी ने पूरी ज़िंदगी एक ही सपना देखा — “रेटायरमेंट के बाद आराम करूँगा।” नौकरी में — “अभी थोड़ा और।” त्योहार में — “रिटायर होने दो,…
पूरा पढ़ें →देह रुकी, मन बह चला’ : मन की अनवरत यात्रा का काव्य-संसार
September 20, 2026 · 4 मिनटमेरी कविता-संग्रह ‘देह रुकी, मन बह चला’ पर इंदौर समाचार पत्र में समीक्षक: नृपेन्द्र अभिषेक ‘नृप’ द्वारा दी गई पुस्तक समीक्षा मेरे लिए एक सुखद और आत्मीय…
पूरा पढ़ें →आईआईटी की तीसरी मौत: मेरिट के दुर्ग में जाति की सेंध
September 20, 2026 · 7 मिनटमुंबई के पवई इलाके में आईआईटी बॉम्बे का कैंपस देश के सबसे चमकदार सपनों का पता माना जाता है। बारहवीं की परीक्षा देने वाले लाखों बच्चे…
पूरा पढ़ें →अनुकरण की संस्कृति : अतीत से वर्तमान की यात्रा
September 20, 2026 · 17 मिनटअनुकरण की संस्कृति गढ़ने की ढाई हज़ार साल पुरानी भारतीय तरकीब एक लड़का जंगल में मिट्टी की एक मूर्ति बनाता है। सामने कोई गुरु नहीं होता,…
पूरा पढ़ें →“सफलता का कैदी”
September 20, 2026 · 3 मिनटआज मैंने जो मुखौटा पहना है, उसका नाम है—सफलता का कैदी। सुबह के अख़बार में मेरा नाम छपा था। राज्य सेवा परीक्षा की चयनित अभ्यर्थियों…
पूरा पढ़ें →सौ फ़ीसदी टैरिफ़ की धमकी और भारत की स्वतंत्रता का असली इम्तिहान
September 20, 2026 · 7 मिनटकल्पना कीजिए एक ऐसा घर, जिसे बिजली दो पड़ोसियों से मिलती है – एक सस्ती लेकिन विवादित, दूसरी महंगी लेकिन ‘सम्मानजनक’। अब वह पड़ोसी जो महंगी…
पूरा पढ़ें →सपनों पर लगा टैक्स: क्या भारत अब अपने ही युवाओं को घर में मौका देना सीखेगा?
September 20, 2026 · 6 मिनटपिछले तीन दशकों में भारत के लाखों घरों में एक ख़्वाब पला-बढ़ा है। इंजीनियरिंग कॉलेज में दाख़िला लेते ही एक अनकहा रोडमैप तय हो जाता है,…
पूरा पढ़ें →‘देह रुकी, मन बह चला’ : मन की अनवरत यात्रा का काव्य-संसार
September 18, 2026 · 2 मिनट। मेरी कविता-संग्रह ‘देह रुकी, मन बह चला’ पर हरिभूमि समाचार पत्र में समीक्षक: नृपेन्द्र अभिषेक ‘नृप’ द्वारा दी गई पुस्तक समीक्षा मेरे लिए एक सुखद और…
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