मैं नारसिस्ट हूँ : मुझसे बचकर रहना

मैं पहले तुम्हें आसमान दूँगा…
और फिर चुपचाप  तुम्हारे पैरों के नीचे से जमीन  खींच लूँगा।”

इसलिये कहता हूँ , खुद को मुझसे बचा कर रखना                                                                                        मैं तुम्हें चाह तो सकता हूँ, पर अपनी फ़ितरत से तुम्हें बचा नहीं सकता
मैं तुम्हें इतना चाहूँगा  कि तुम डर जाओ।
इतनी तारीफ करूंगा , कि तुम्हें अपनी हैसियत भूलने लगो ।
तुम इसे   Love Bombing कहोगी मेरी ,                                                                                                   मगर बेशर्मी से कर कह दूंगा मैं कि  “प्यार की बाढ़ में किनारे नहीं होते।”

कल जो बात मैंने कही थी, आज उससे साफ़ मुकर जाता हूँ।
तुम पूछती हो—“पर तुमने तो ऐसा कहा था न?”
मैं मुस्करा कर बोलता हूँ—“अपनी याददाश्त का इलाज़ कराओ डार्लिंग।”
तुम्हारी आँखों में सच भी डर से कांपने लगता है।
तुम इसे Gaslighting कहती हो,
मैं इसे “वास्तविकता का संपादन”।

मैं तुम्हें चुप्पी देता हूँ— पूरी, ठंडी, निर्दयी।
डर कर तुम बिना अपराध किये भी माफ़ी माँगती हो।
तुम्हारा आत्मविश्वास धीरे-धीरे मेरी जेब में गिर जाता है।
हर बार तुम्हें लगता है, इस बार भी गलती तुम्हारी ही है।
और मैं मुतमइन रहता हूँ कि खेल सही चल रहा है।

कभी मैं कहता हूँ—“तुम्हारे बिना मैं कुछ नहीं।”
और कभी चीखता हूँ तुम पर कि “तुमने मुझे बर्बाद कर दिया।”
तुम्हारा मन इन दो विपरीत सच्चाइयों में
फँस कर रह जाता है।
तुम इसे मानसिक हिंसा कहती हो,
मैं इसे महज “रिश्ते की जटिलता”।

सुना है—सोलह लोगों को एक कमरे में बैठाओ,
तो उनमें से एक नार्सिसिस्ट होता है।
और तुम्हें पूरा यक़ीन है कि वो एक मैं हूँ 
और शायद तुम गलत भी नहीं हो।

मेरे क़रीबी लोग थके हुए हैं।
पर कोई छोड़ नहीं सकता,
कोई छोड़ना चाहता भी नहीं।
मैं खून के रिश्तों में  क़हर हूँ,
और प्रेम संबंधों में मीठा  ज़हर ।

लेकिन सुनो— मैं कोई राक्षस नहीं हूँ।
मैं भी एक आदमी हूँ जिसने  बस खुद को
इतना बड़ा बना लिया कि अब
किसी और के लिए जगह ही नहीं बची।

इसलिए अब मैं खुद लोगों से कहता हूँ—
मेरे बहुत पास मत आना।
मेरे शब्द सुंदर हैं,
मेरी सफ़ाइयाँ 
दिल छू लेने वाली।
मैं रुलाते  हुए भी
तुम्हें दोषी ठहरा सकता हूँ।

इसलिए अगर कभी मैं तुम्हें
ख़ास महसूस कराऊँ—तो सावधान रहना।
अगर मैं तुम्हें दुनिया का केंद्र बना दूँ—
तो भाग जाना मुझसे दूर

क्योंकि अंत में जब तुम मुझे छोड़ोगी,
लोग मुझ पर नहीं, तुम पर  ही सवाल उठाएँगे।
और मैं बहुत शांत स्वर में कहूँगा—
“देखा, दिखा दीं उसने औकात अपनी ।”

लोग मुझे नार्सिसिस्ट कहते हैं।
शायद इसलिए मैं अब खुद ही अपील करता हूँ—

मुझसे प्यार मत करना।
मुझसे प्रभावित मत होना।
और अगर हो भी जाओ—
तो समय रहते
खुद को बचा लेना।

क्योंकि मैं तुम्हें चाह सकता हूँ…
लेकिन मैं तुम्हें अपने आप से महफ़ूज़
नहीं रख सकता।

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