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‘देह रुकी, मन बह चला’ : नवभारत में प्रकाशित पुस्तक समीक्षा

मेरी कविता-संग्रह ‘देह रुकी, मन बह चला’ पर नवभारत, रायपुर में प्रकाशित पुस्तक समीक्षा मेरे लिए एक सुखद और आत्मीय अनुभव है।

वरिष्ठ समीक्षक नूपेंद्र अभिषेक नृप ने अपनी समीक्षा में इस काव्य-संग्रह को मन की अनवरत यात्रा और मानवीय संवेदनाओं का काव्य-संसार बताते हुए इसकी कविताओं के भाव पक्ष और सहज अभिव्यक्ति को रेखांकित किया है।

समीक्षा में पुस्तक की कविताओं को प्रेम, संवेदना, आत्मीयता, जीवन-दर्शन और मनुष्य के भीतर चलने वाली निरंतर यात्रा से जोड़कर देखा गया है। समीक्षक के अनुसार, इन कविताओं में जीवन के अनुभवों और भावनाओं को सहज भाषा में अभिव्यक्त करने का प्रयास दिखाई देता है।

मेरे लिए किसी पाठक या समीक्षक द्वारा मेरी रचनाओं को पढ़कर उनके भीतर के भावों तक पहुँचना और उन्हें अपने शब्दों में अभिव्यक्त करना, स्वयं में एक रचनात्मक उपलब्धि है। ‘देह रुकी, मन बह चला’ मेरे लिए केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलती उन यात्राओं का दस्तावेज है, जहाँ देह कहीं ठहर जाती है, लेकिन मन अपनी यात्रा जारी रखता है।

नवभारत में प्रकाशित इस पुस्तक समीक्षा के लिए समीक्षक नूपेंद्र अभिषेक नृप एवं समाचार पत्र के संपूर्ण संपादक मंडल का हृदय से आभार।

पुस्तक: देह रुकी, मन बह चला
लेखक: रविकान्त राऊत
प्रकाशित समीक्षा: नवभारत, रायपुर
दिनांक: 20 जुलाई 2026
समीक्षक: नूपेंद्र अभिषेक नृप

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