
तुम्हें जान लेने के बाद भी
मैं तुम्हें और पढ़ना चाहता हूँ।
तुम्हारी हँसी देखने के बाद अब
तुम्हारी खामोशी पढ़ना चाहता हूँ,
तुम्हारी आँखों के उजाले तो देख लिये मैंने
अब उनमें उतरती हुई शाम पढ़ना चाहता हूँ।
जो कुछ कहा था तुमने कहा,
वह सब तो सब सुन लिया मैंने
अब वह पढ़ना चाहता हूँ
जिसे पढ़ने से कभी ,
रोक लिया था तुमने
कोई ज़ल्दी नहीं है मुझे
न कोई ज़िल्द हो तुम कि
किसी दिन बंद कर दूँ तुम्हें
तुम तो वह पन्ना हो जो हर रोज़
कुछ और रौशन हुआ करता है
मुझसे पूछे अगर कोई कि
मोहब्बत क्या है
तो मैं कहूँगा
किसी को उम्र भर पढ़ते रहना
और फिर भी यह कहना कि
अभी तो कुछ और पन्ने बाकी हैं… यार ।
रविकान्त राऊत
जबलपुर ,मध्यप्रदेश
9425611243
