हम भारतीय पुरुष की कमर हैं। हमें “हाय” कहना नहीं आता। सुबह सात बजे सिलेंडर ख़त्म हुआ। रमेश उठा, तीन मंज़िल उतरा, सिलेंडर वाले से माथापच्ची की, पुराना सिलेंडर कंधे पर लादा, तीन मंज़िल चढ़ा, रसोई में रखा, जोड़ा लगाया, गैस चालू की। कमर को पता भी नहीं चला।
नौ बजे छत पर गया, टंकी देखी भरी है या नहीं, मोटर चालू की, वापस गया। आधे घंटे बाद फिर गया ये देखने कहीं ओवरफ्लो न हो जाए। तीन बार चढ़ा तीन बार उतरा। कमर चुपचाप रही।
ग्यारह बजे स्कूटर पंचर। रमेश ने धक्का लगाया, गर्मी में, तीन किलोमीटर। पसीना, गाली, फिर पसीना। कमर ने एक बार भी शिकायत नहीं की।
दोपहर को सब्ज़ी लाई, भारी थैले, दोनों हाथ लगा बेज़ान हो कर टूट जायेंगे , उँगलियों में लकीरें पड़ गईं। फिर भी कूलर में पानी भरा तीसरी बार। कार की स्टेपनी बदली धूप में, ज़मीन पर बैठकर, हाथ काले, कपड़े काले। कमर मौन, निष्ठावान, कर्तव्यपरायण।
शाम सात बजे टीवी चला। आयोडेक्स का विज्ञापन आया। परदे पर एक सुंदर महिला, कमर पर हाथ रखे, भौंहें तनी हुईं, आँखों में असह्य पीड़ा। हाय रे मेरी कमर। रमेशजी की पत्नी जो दिन भर सोफ़े पर नेटफ्लिक्स देखती रहीं, जिनके हाथ में रिमोट था और मुँह में बिस्किट, सोफ़े से उठीं। कमर पर हाथ रखा, आँखें मूँदीं। बोलीं, हाय रे मेरी कमर आज तो बहुत दर्द है।
रमेश ने टीवी की तरफ़ देखा, विज्ञापन की तरफ़ देखा, पत्नी की तरफ़ देखा। फिर अपनी कमर की तरफ़ देखा जो सिलेंडर उठाने के बाद भी चुप थी, स्टेपनी बदलने के बाद भी चुप थी, धक्का लगाने के बाद भी चुप थी। रमेश ने सोचा, शायद मेरी कमर को आयोडेक्स का विज्ञापन नहीं दिखा।
रमेश उठा, बेडरूम में गया, पत्नी के लिए आयोडेक्स लेकर आया, लगाया, हल्के हाथ से। पत्नी ने आँखें खोलीं, थैंक्यू अब ज़रा ठंडा पानी देना। रमेश गया, पानी लाया, सोफ़े के पास रखा, वापस जाने लगा। तभी पत्नी ने पूछा, तुम्हें कुछ नहीं होता, दिन भर इतना काम करते हो।
रमेश रुका, मुड़ा। सोचा, अभी बताऊँ, सिलेंडर, स्टेपनी, सब्ज़ी, टंकी, कूलर। फिर देखा, पत्नी की आँखें बंद हो गई थीं। आयोडेक्स लगी कमर सोफ़े में धँस गई थी। उसे मीठी नींद आ गई थी। रमेश वापस मुड़ा। वो कूलर में पानी भरने गया, चौथी बार।
रात को रमेश बिस्तर पर लेटा, छत देखता रहा। उसकी कमर ने पहली बार धीरे से कहा, भाई थोड़ी तो तारीफ़ करते हमारी भी। रमेश ने कहा, चुप, कल सुबह फिर कोई सिलेंडर आएगा, फिर कुछ… फिर कुछ । कमर बेचारी चुप हो गई, जैसे हमेशा होती है।
अगली सुबह विज्ञापन फिर आएगा। कमर फिर दर्द करेगी। पर किसकी, यह आप समझ गए हैं।
ये भारतीय पुरुष की कमर हैं। इन्हें हाय कहना नहीं आता।
(रविकान्त राऊत)
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सर,
बेमिसाल प्रस्तुति और ऑडियो के साथ इसके संयोजन ने इसे और भी जीवंत बना दिया,
बहुत सुंदर…🙏
सर,
बेमिसाल प्रस्तुति और ऑडियो के साथ इसके संयोजन ने इसे और भी जीवंत बना दिया,
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