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संपादकीय

जो ज़हर मरता नहीं, उसकी सीमा कौन तय करेगा?

फॉरएवर केमिकल्स के बारे में सबसे डराने वाली बात उनका ज़हर नहीं, उनका नाम है। ये रसायन सच में “हमेशा के लिए” रहते हैं। ये न…

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दस साल का क़ानून, पचास हज़ार बच्चों का इंतज़ार

किशोर न्याय का असली इम्तिहान अदालत के भाषणों में नहीं, उस पंद्रह साल के लड़के के इंतज़ार में होता है जो महीनों से एक बोर्ड के…

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ठगी का पूरा बोझ ग्राहक के ही कंधे पर क्यों?

देश में साइबर ठगी अब किसी इक्का-दुक्का बदक़िस्मत की कहानी नहीं रह गई है। अपने आसपास ही नज़र डालिए। किसी रिटायर्ड शिक्षक को “डिजिटल अरेस्ट” के…

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जब एफआईआर ‘पदक’ बन जाए, सवाल कौन पूछेगा?

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठा सवाल इस हफ़्ते दिल्ली की सड़कों तक पहुँच गया, पर सड़क पर पहुँचते-पहुँचते वह सवाल किसी और ही चीज़ में…

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हथकड़ी से हिसाब तक: टैक्स वसूली में भरोसे की परीक्षा

जीएसटी गिरफ़्तारी का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव आज जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की मेज़ पर है, और यह सिर्फ़ टैक्स कानून की एक धारा का…

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कैंसर की दवा पर दस गुना मुनाफ़ा: इलाज या वसूली?

किसी परिवार में जब पहली बार “कैंसर” शब्द बोला जाता है, तो उसी दिन से घर का हिसाब-किताब बदल जाता है। पहले रिपोर्टें आती हैं, फिर…

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भूजल के लगातार सूखते जाने का संकट

विगत दिनों  दिल्ली के भारत मंडपम में एक बड़ा तमाशा शुरू हुआ। नौवां “इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक” खुला है, उपराष्ट्रपति ने इसका उद्घाटन किया , दुनिया…

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ग्रेट निकोबार: जिनसे पूछा ही नहीं गया, उनकी ‘हाँ’ कैसे मान ली?

किसी से उसकी ज़मीन माँगने के दो तरीके होते हैं। पहला, उसके सामने बैठकर पूरी बात बताई जाए: क्या बनेगा, कितना जंगल कटेगा, उसका गाँव कहाँ…

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