Author: रविकान्त राऊत

सबका चहेता

दुनिया अक्सर सच से ज़्यादा presentation पर भरोसा करती है।असली अपराधी डरावने नहीं,भरोसेमंद दिखते हैं और अक्सर वही होते हैं जिन्हें हम“सबसे अच्छा इंसान”घोषित कर चुके…

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भय का प्रहरी

“रात 2:17।अनजान नंबर।मैंने उठाया।चुप्पी।फिर एक औरत की आवाज़—‘तुम जाग रहे हो…’मैं जम गया।‘कौन?’उसने कहा—‘तुम्हें डर लग रहा है ना?’फोन कट गया।लेकिन मेज़ पर एक काग़ज़ था—जो…

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सफलता का कैदी

आज मैंने जो मुखौटा पहना है,उसका नाम है—सफलता का कैदी। सुबह के अख़बार में मेरा नाम छपा था। राज्य सेवा परीक्षा—चयनित अभ्यर्थियों की सूची। घर में…

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