जलती हुई बाती
May 24, 2026मध्यप्रदेश के एक छोटे-से कस्बे में—जहाँ शाम को अज़ान और मंदिर की घंटी एक साथ सुनाई देती है—वहाँ की एक गली में सुधीर और मालती का…
पूरा पढ़ें →मध्यप्रदेश के एक छोटे-से कस्बे में—जहाँ शाम को अज़ान और मंदिर की घंटी एक साथ सुनाई देती है—वहाँ की एक गली में सुधीर और मालती का…
पूरा पढ़ें →माँ ने पूछा—“बेटा,सब ठीक है?” मैंने कहा—“हाँ माँ।” झूठ नहीं था।सच भी नहीं था। बस वो मुखौटा था—जो हम माँ-बाप के लिए पहनते हैं।ताकि वे चिंता…
पूरा पढ़ें →दुनिया अक्सर सच से ज़्यादा presentation पर भरोसा करती है।असली अपराधी डरावने नहीं,भरोसेमंद दिखते हैं और अक्सर वही होते हैं जिन्हें हम“सबसे अच्छा इंसान”घोषित कर चुके…
पूरा पढ़ें →“रात 2:17।अनजान नंबर।मैंने उठाया।चुप्पी।फिर एक औरत की आवाज़—‘तुम जाग रहे हो…’मैं जम गया।‘कौन?’उसने कहा—‘तुम्हें डर लग रहा है ना?’फोन कट गया।लेकिन मेज़ पर एक काग़ज़ था—जो…
पूरा पढ़ें →आज मैंने जो मुखौटा पहना है,उसका नाम है—सफलता का कैदी। सुबह के अख़बार में मेरा नाम छपा था। राज्य सेवा परीक्षा—चयनित अभ्यर्थियों की सूची। घर में…
पूरा पढ़ें →उस शाम मैं एक छोटे से कमरे में बैठा था।कमरा किराए का था। दीवारों पर कोचिंग संस्थानों के पोस्टर लगे थे— “सफलता अब दूर नहीं” “आपका…
पूरा पढ़ें →उस शाम मैं एक शादी में था। भारतीय शादियाँ अजीब जगह होती हैं। यहाँ संगीत भी होता है,मिठाइयाँ भी,और साथ-साथ अदृश्य मंच भी—जहाँ हर कोई अपनी…
पूरा पढ़ें →उस सुबह मैं बस अड्डे पर खड़ा था। छोटे शहर का बस अड्डा था। वहीं जहाँ चाय की भाप,धूल,पसीना और इंतज़ार—सब एक ही हवा में घुल…
पूरा पढ़ें →मेरे भीतर कई कमरे हैं। हर कमरे में एक मुखौटा टंगा है। जिंदगी जब भी मेरे सामने कोई नई चुनौती रखती है,मैं उनमें से एक मुखौटा…
पूरा पढ़ें →यह कथा हर उस लेखक, कलाकार, इंसान की है जो किसी दोस्त की सफलता पर ताली बजाते हुए भीतर से कुछ महसूस करता है जिसे वह…
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