Author: रविकान्त राऊत

खुली संभावनाओं का मुखौटा

सुबह 6 बजे।मैंने गैस जलाई।क्लिक हुई।आग नहीं लगी।उस क्षण—पहली बार मुझे‘गैस’दिखी।पहले वह सिर्फ़‘चाय बनाने का ज़रिया’थी।अब घटना एक रूटीन का टूटना थी और उस टूटन में—मुझे…

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सही बंदा है यार का मुखौटा

10 में से 1 व्यक्ति ऐसा होता है—जो जहाँ भी जाता है,वहाँ ज़हर घोल देता है।समस्या यह नहीं कि वे मौजूद हैं।समस्या यह है—हम उन्हें पहचानते…

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सामान्यता का मुखौटा, जहां दीवारें भूलती नहीं

“सामान्यता का मुखोटा-जहां दीवारें याद रखती हैं” मैं तीन महीने, पाँच दिन और सत्रह घंटे से इसी कमरे में हूँ, लेकिन कमरा शायद सैकड़ों साल से…

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