Author: रविकान्त राऊत

थकावट का मुखौटा

आज मैं मजबूत दिख रहा था।कम से कम बाहर से।सुबह की तरह दिन शुरू हुआ।काम की सूची लंबी थी।लोग उम्मीदों के साथ खड़े थे।हर बातचीत में…

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अनाम ख़त

अलमारी के हर ख़ाने पर करीने से पर्चियां चिपका रखी हैं अब यादों को तलाशने में वक़्त ज़ाया नहीं होता आज एक ख़त अचानक निकल आया…

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