श्रेणी

आलेख

सपनों पर लगा टैक्स: क्या भारत अब अपने ही युवाओं को घर में मौका देना सीखेगा?

पिछले तीन दशकों में भारत के लाखों घरों में एक ख़्वाब पला-बढ़ा है। इंजीनियरिंग कॉलेज में दाख़िला लेते ही एक अनकहा रोडमैप तय हो जाता है,…

पूरा पढ़ें →

बहुध्रुवीयता का दिल्ली संस्करण

बारह और तेरह सितंबर को दिल्ली में कुछ ऐसा हुआ जो पिछले एक दशक की भारतीय कूटनीति में दुर्लभ था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन…

पूरा पढ़ें →

जिनके पास कागज़ नहीं, क्या लोकतंत्र में उनकी जगह भी नहीं?

दिल्ली की एक बस्ती में रहने वाला मज़दूर, जो पिछले पंद्रह बरसों से हर चुनाव में वोट डालता आया है, अचानक पाता है कि उसका नाम…

पूरा पढ़ें →

तेल, टैरिफ और तटस्थता की असली परीक्षा

एक अमीर दोस्त का सबसे बड़ा हथियार क्या होता है? यह धमकी नहीं कि वह रिश्ता तोड़ देगा, बल्कि यह याद दिलाना कि रिश्ता उसकी मर्ज़ी…

पूरा पढ़ें →

पगार से पहले पीएफ: 25,000 की नई सीमा किसकी जेब भरेगी, किसकी काटेगी?

महीने की पहली तारीख़ को जब सैलरी स्लिप खुलती है, तो ज़्यादातर लोग सीधे एक ही आंकड़े पर नज़र डालते हैं — “इन-हैंड” कितना आया। बाकी…

पूरा पढ़ें →

वंदे मातरम :एक गीत जिसे अनुमति नहीं, बराबरी चाहिए थी

15 अगस्त की सुबह जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर पर पहुँचेंगे, तो पहली आवाज़ जन गण मन की नहीं होगी। आज़ादी के अस्सी…

पूरा पढ़ें →

कृष्ण बनाम जेन-ज़ी

जन्माष्टमी के उत्सव के समांतर, अगर हम कृष्ण को देवता के खोल से बाहर निकालकर सिर्फ एक किरदार की तरह देखें, तो सामने एक ऐसा युवा…

पूरा पढ़ें →

हिंदी चुनना: पीछे लौटना नहीं, अपनी आवाज़ को ऊँचा करना

कल्पना कीजिए कि कोई 22 साल का युवा है। उसे कोडिंग आती है, वह आर्टिफिशियल-इंटेलीज़ेंस समझता है, इंस्टाग्राम पर रील्स बनाता है, व्हाट्सएप पर बात करता…

पूरा पढ़ें →

एक अच्छी हिंदी बोलने वाला युवा कहाँ पहुँच सकता है

आज कैमरा सबके पास है। AI भी सबके पास पहुँच रहा है। लेकिन प्रभावशाली भाषा अभी भी सबके पास नहीं है। यही वह जगह है जहाँ…

पूरा पढ़ें →